टॉप 1,000 कंपनियों में 75% के शेयर 30% टूटे, क्या आप करेंगे निवेश?
घरेलू शेयर बाजार ने गिरावट के बाद अच्छी तेजी दिखाई है. यह तेजी कई जानकारों की उम्मीद से अच्छी रही है. 26 अक्टूबर से नवंबर के अंत तक निफ्टी करीब 8.4 फीसदी चढ़ा है. बाजार में इस तेजी का कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था में आया बड़ा बदलाव रहा.
खासकर ब्रेंट क्रूड की कीमतों में आई बड़ी गिरावट से तेजड़ियों को बाजार पर अपनी पकड़ बढ़ाने में मदद मिली. क्रूड की कीमतों में नरमी से आयात खर्च घटेगा और अर्थव्यवस्था पर महंगाई का दबाव कम होगा.
एक महीने के भीतर ब्रेंट क्रूड की कीमत $85 प्रति बैरल से करीब 30 फीसदी घटकर $59 प्रति बैरल पर आ गई. यदि कीमत इस स्तर पर बनी रहती है तो भारत कच्चे तेल के आयात पर खर्च होने वाली रकम में 21 अरब डॉलर (सालाना) की बचत कर सकता है.
सितंबर-अक्टूबर में बाजार की पिटाई का असर अब भी नजर आ रहा है. मिडकैप और स्मॉलकैप सेगमेंट में इसके जख्म ज्यादा गहरें हैं. मार्केटकैप के आधार पर टॉप 1,000 शेयरों में से करीब 75 फीसदी शेयरों ने बीते एक साल में नकारात्मक रिटर्न दिया है. एक तिहाई शेयर 30 फीसदी से ज्यादा लुढ़के हैं.
कच्चे तेल की कीमतों में कमजोरी ने महंगाई दर में वृद्धि की उम्मीदों को कम कर दिया है. इससे डेट बाजार के सेंटिमेंट में सुधार होगा. हालांकि, निवेशकों को एसेट एलोकेशन और निवेश की अवधि को लेकर सावधान रहने की जरूरत है.
मौजूदा समय में चुनौतियों और अवसरों के बीच बढ़िया संतुलन है. एक तरह जहां निवेशकों में परिपक्वता में इजाफा हो रहा है, तो दूसरी तरफ प्रतियोगिता भी काफी बढ़ रही है. इसका सीधा असर कुल पोर्टफोलियो रिटर्न पर पड़ रहा है.
यह समय वित्तीय कंपनियों के लिए 'टेलिकॉम' सेक्टर से सबक लेने का है. इसका अर्थ है कि बैंकिंग, निवेश और बीमा जैसी सेवाएं किफायत और सरलता के साथ मुहैया कराई जाए. जनधन और आधार के मोबाइल से लिंक होने से वित्तीय लेन-देन काफी सरल हो गया है.
वित्तीय सेवा सेक्टर तेजी से पैर पसार रहा है. मगर इसे गांवों तक पहुंचना होगा. वित्तीय सेक्टर में भी कंपनियों की पकड़ हिंदुस्तान यूनिलीवर जैसी होनी चाहिए ताकि अंतिम व्यक्ति को इससे जोड़ा जा सके. काफी हद तक यह काम शुरू हो चुका है.
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खासकर ब्रेंट क्रूड की कीमतों में आई बड़ी गिरावट से तेजड़ियों को बाजार पर अपनी पकड़ बढ़ाने में मदद मिली. क्रूड की कीमतों में नरमी से आयात खर्च घटेगा और अर्थव्यवस्था पर महंगाई का दबाव कम होगा.
एक महीने के भीतर ब्रेंट क्रूड की कीमत $85 प्रति बैरल से करीब 30 फीसदी घटकर $59 प्रति बैरल पर आ गई. यदि कीमत इस स्तर पर बनी रहती है तो भारत कच्चे तेल के आयात पर खर्च होने वाली रकम में 21 अरब डॉलर (सालाना) की बचत कर सकता है.
सितंबर-अक्टूबर में बाजार की पिटाई का असर अब भी नजर आ रहा है. मिडकैप और स्मॉलकैप सेगमेंट में इसके जख्म ज्यादा गहरें हैं. मार्केटकैप के आधार पर टॉप 1,000 शेयरों में से करीब 75 फीसदी शेयरों ने बीते एक साल में नकारात्मक रिटर्न दिया है. एक तिहाई शेयर 30 फीसदी से ज्यादा लुढ़के हैं.
कच्चे तेल की कीमतों में कमजोरी ने महंगाई दर में वृद्धि की उम्मीदों को कम कर दिया है. इससे डेट बाजार के सेंटिमेंट में सुधार होगा. हालांकि, निवेशकों को एसेट एलोकेशन और निवेश की अवधि को लेकर सावधान रहने की जरूरत है.
मौजूदा समय में चुनौतियों और अवसरों के बीच बढ़िया संतुलन है. एक तरह जहां निवेशकों में परिपक्वता में इजाफा हो रहा है, तो दूसरी तरफ प्रतियोगिता भी काफी बढ़ रही है. इसका सीधा असर कुल पोर्टफोलियो रिटर्न पर पड़ रहा है.
यह समय वित्तीय कंपनियों के लिए 'टेलिकॉम' सेक्टर से सबक लेने का है. इसका अर्थ है कि बैंकिंग, निवेश और बीमा जैसी सेवाएं किफायत और सरलता के साथ मुहैया कराई जाए. जनधन और आधार के मोबाइल से लिंक होने से वित्तीय लेन-देन काफी सरल हो गया है.
वित्तीय सेवा सेक्टर तेजी से पैर पसार रहा है. मगर इसे गांवों तक पहुंचना होगा. वित्तीय सेक्टर में भी कंपनियों की पकड़ हिंदुस्तान यूनिलीवर जैसी होनी चाहिए ताकि अंतिम व्यक्ति को इससे जोड़ा जा सके. काफी हद तक यह काम शुरू हो चुका है.
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